फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला में रामसेतु निर्माण का हुआ मंचन, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने उतारी आरती
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला में रविवार को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। इसमें हनुमान जी के माता सीता का पता लगाकर प्रभु श्रीराम के पास लौटने, रावण द्वारा विभीषण को लंका से निष्कासित करने, विभीषण के श्रीराम की शरण में आने और रामसेतु निर्माण तक की लीला का मंचन हुआ। कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को भक्ति और मर्यादा के प्रसंगों से रूबरू कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री और नगर विधायक सुरेश कुमार खन्ना ने भगवान के स्वरूपों की आरती उतारकर किया।
चूड़ामणि लेकर श्रीराम के पास पहुंचे हनुमान
मंचन में दिखाया गया कि लंका में माता सीता का पता लगाने के बाद हनुमान जी उनसे भेंट करते हैं। माता सीता उन्हें अपनी चूड़ामणि सौंपकर प्रभु श्रीराम तक अपना संदेश पहुंचाने को कहती हैं। इसके बाद हनुमान जी लंका से लौटकर प्रभु श्रीराम को चूड़ामणि सौंपते हैं और माता सीता की स्थिति से अवगत कराते हैं। वह बताते हैं कि माता सीता प्रभु श्रीराम का निरंतर स्मरण कर रही हैं और रावण की कैद से मुक्ति की प्रतीक्षा कर रही हैं।
इससे पहले हनुमान जी द्वारा सोने की लंका जलाने और खर-दूषण, त्रिशिरा तथा अक्षय कुमार के वध से रावण चिंतित हो उठता है। उसे आशंका होने लगती है कि श्रीराम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि नारायण के अवतार हैं।
रावण ने लात मारकर विभीषण को लंका से निकाला
लीला के अगले प्रसंग में विभीषण रावण को समझाते हैं कि वह माता सीता को सम्मानपूर्वक प्रभु श्रीराम को लौटा दे और अपने किए की क्षमा मांग ले। विभीषण की इस सलाह से रावण क्रोधित हो जाता है। वह भरी सभा में विभीषण का अपमान कर उन्हें लंका से निष्कासित कर देता है।
इसके बाद विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं। हनुमान जी उन्हें श्रीराम के पास ले जाते हैं। प्रभु श्रीराम विभीषण का सम्मानपूर्वक स्वागत करते हैं और उन्हें अपनी सेना में शामिल कर लेते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि सत्य और धर्म का साथ देने वाले व्यक्ति को सम्मान मिलता है, जबकि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है।
नल-नील ने शुरू कराया रामसेतु निर्माण
रामलीला में आगे दिखाया गया कि समुद्र से लंका जाने का मार्ग देने की प्रार्थना स्वीकार न होने पर प्रभु श्रीराम धनुष-बाण उठाते हैं। इसके बाद समुद्र देव प्रकट होकर उनसे क्षमा मांगते हैं और नल-नील की सहायता से समुद्र पर सेतु निर्माण का उपाय बताते हैं।
इसके बाद प्रभु श्रीराम श्रीरामेश्वरम की स्थापना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। फिर वानर सेना के सहयोग से रामसेतु निर्माण शुरू कराया जाता है। इस प्रसंग के साथ मंचन में भक्ति, धर्म, मर्यादा, समर्पण और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया।
इन्होंने निभाए प्रमुख किरदार
रविवार के मंचन में राम की भूमिका मोहित बाजपेई, लक्ष्मण की अमित श्रीवास्तव, हनुमान की अंकित अवस्थी, सीता की रानी मिश्रा, अंगद की संदीप आर्य, केसरी की सौरभ मोहन, जामवंत की अजीत, नील की अर्जुन, नल की पीयूष राणा, तार की सूर्यांश, सुषेण की विनोद पांडे, कुंभकरण की लक्ष्मण मिश्रा और विभीषण की देवेंद्र पाल ने निभाई। इसके अलावा मंत्री की भूमिका मनोज रामपाल, मनीष की भूमिका नवनीत, रामविलास की अंशुल, शिवम की राजकुमार, ईश्वर दिन की सुख सारंग, बटेश्वर की दयाल और अंकुश सहित अन्य कलाकारों ने विभिन्न पात्रों का अभिनय किया।
मुख्य अतिथि वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं सदस्य विधान परिषद सुधीर कुमार गुप्ता और विशेष अतिथि सांसद अरुण कुमार सागर , जिला सहकारिता अध्यक्ष डीपीएस राठौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय यादव, कैंटोनमेंट के उपाध्यक्ष अवधेश दीक्षित आदि रहे।
कार्यक्रम में मंचन सचिव एके व्यास, देवेश दीक्षित, संयुक्त सचिव अजय सक्सेना, निर्देशक अंकित सक्सेना, प्रभारी महेंद्र दीक्षित, सुरक्षा पर्यवेक्षक राममोहन अग्निहोत्री, व्यवस्थापक प्रदीप अग्निहोत्री, भोजन व्यवस्थापक रामकुमार दीक्षित, मंचन मीडिया प्रभारी रोहित सक्सेना और मंच संचालक सतीश सक्सेना सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।