कथित फर्जी दस्तावेजों से भूमि बेचने का आरोप, नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
जागरण टुडे, शाहजहांपुर
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित खिरनीबाग स्थित कालीबाड़ी मंदिर की भूमि को कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने के आरोप को लेकर शनिवार को लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। जागरूक नागरिकों ने सदर बाजार थाने का घेराव कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर भूमि के वास्तविक स्वामित्व का पता लगाने, धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कालीबाड़ी मंदिर परिसर की जमीन को कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने का प्रयास किया गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भूमि से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच कराई जाए, जिससे वास्तविक स्वामित्व स्पष्ट हो सके। लोगों ने कहा कि मंदिर की जमीन का मामला धार्मिक आस्था के साथ-साथ शहर की ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा है। इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
मंदिर परिसर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में बताया कि खिरनीबाग स्थित कालीबाड़ी मंदिर परिसर का नगर में विशेष धार्मिक महत्व है। यहां माता काली, माता शीतला, भगवान शंकर और हनुमान जी के मंदिर स्थित हैं। इसके अलावा परिसर में शनि मंदिर, एक कुआं और पीपल, नीम तथा बरगद के पूजनीय पेड़ भी हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से इस स्थान पर धार्मिक गतिविधियां करते आ रहे हैं।
लोगों के अनुसार, शादी-विवाह सहित विभिन्न मांगलिक आयोजनों में यहां कुआं पूजन की परंपरा निभाई जाती है। प्रत्येक वर्ष होलिका दहन भी इसी स्थान पर होता है। होली के अवसर पर निकलने वाला नवाब साहब का जुलूस भी यहीं से शुरू होता है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों ने मंदिर परिसर को धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताते हुए इसकी सुरक्षा की मांग की।
दान में मिली थी जमीन, विद्यालय भी बनवाने का दावा
ज्ञापन में दावा किया गया कि पंडित शिवदयाल मिश्रा ने यह भूमि कोलकाता निवासी पंडित राधिका प्रसाद चक्रवर्ती को दान में दी थी। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, इसके बाद यहां मंदिरों का निर्माण कराया गया। साथ ही कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए कक्षा पांच तक का विद्यालय भी बनवाया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने इस इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि भूमि के स्वामित्व और उससे जुड़े पुराने दस्तावेजों की जांच जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राजस्व अभिलेखों, दान से संबंधित दस्तावेजों और भूमि की बिक्री से जुड़े कागजात का सत्यापन कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन का वास्तविक स्वामी कौन है और कथित बिक्री की प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या नहीं।
निष्पक्ष जांच और धार्मिक स्थल की सुरक्षा की मांग
नगर मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में भूमि के स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने, कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच कराने और मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई की जा सके और मंदिर परिसर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत सुरक्षित रहे।
इस दौरान एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त के प्रतिनिधि नीरज बाजपेई के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। मौके पर एडवोकेट राजेश अवस्थी, एडवोकेट गौरव त्रिपाठी, ठाकुर अजय सिंह, महानगर संयोजक सक्षम (आरएसएस) ठाकुर मनोज सिंह, ठाकुर उदयवीर सिंह, ठाकुर अखिलेश सिंह, हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष ठाकुर अजय सिंह, मोनू अवस्थी, कुशाग्र पंडित, अपार कश्यप, दिनेश कनौजिया, झब्बू लाल कनौजिया, बलिराम कश्यप, नीरज राठौर, लालाराम वर्मा, आलोक सिंह, अक्षत गुप्ता, मनोज अवस्थी और आशीष चौधरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।