राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में रविवार को तीन महत्वपूर्ण कार्यों का लोकार्पण किया गया। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने नवनिर्मित मुख्य द्वार, बाउंड्रीवॉल और जनरल मेडिसिन विभाग में स्थापित एंडोस्कोपी लैब का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में सांसद अरुण कुमार सागर भी मौजूद रहे। इन सुविधाओं के शुरू होने से मेडिकल कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ मरीजों को आधुनिक जांच की सुविधा भी मिल सकेगी।
मुख्य द्वार और बाउंड्रीवॉल से सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में मुख्य द्वार और बाउंड्रीवॉल का निर्माण होने से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। अस्पताल परिसर में अनधिकृत वाहनों, निराश्रित पशुओं और असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।
मुख्य द्वार के व्यवस्थित संचालन से वाहनों और एंबुलेंस की आवाजाही सुचारु हो सकेगी। इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को इमरजेंसी तक पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी। वहीं, बाउंड्रीवॉल बनने से अस्पताल परिसर में स्वच्छ और शांत वातावरण बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सांसद अरुण कुमार सागर ने कहा कि वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयासों से मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। इसका सीधा लाभ जिले के मरीजों को मिलेगा। बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को जांच और उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करने की जरूरत भी कम होगी।
एंडोस्कोपी जांच के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूसरे शहर
मेडिकल कॉलेज के जनरल मेडिसिन विभाग में स्थापित नई एंडोस्कोपी लैब मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा साबित होगी। लैब के प्रभारी एवं मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को एंडोस्कोपी जांच के लिए निजी जांच केंद्रों या बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। शासन द्वारा निर्धारित शुल्क पर जांच उपलब्ध होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक राहत मिलेगी।
उन्होंने बताया कि एंडोस्कोपी पाचन तंत्र की जांच करने की एक आधुनिक प्रक्रिया है। पेट दर्द, लगातार उल्टी, सीने में जलन, भोजन निगलने में परेशानी, अचानक वजन कम होने तथा मल या उल्टी में खून आने जैसे लक्षणों के कारणों का पता लगाने में इसका उपयोग किया जाता है।
इस जांच के माध्यम से आहार नली और पेट के अंदर की स्थिति को देखा जा सकता है। इससे बीमारी की पहचान करने और उसके अनुसार उपचार तय करने में मदद मिलती है।
जांच के साथ कुछ उपचार भी होंगे संभव
डॉ. पंकज कुमार सिंह के अनुसार, एंडोस्कोपी का उपयोग केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है। इसके जरिए कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाएं भी की जा सकती हैं। पाचन तंत्र में रक्तस्राव रोकने, गलती से निगली गई सिक्का या पिन जैसी बाहरी वस्तुओं को निकालने और कुछ छोटी गांठों व पॉलिप्स को हटाने में भी यह तकनीक उपयोगी है।
इससे उपयुक्त मामलों में मरीजों को बड़ी सर्जरी से बचाने में मदद मिल सकती है। मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर मरीजों की जांच और उपचार की प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही, निजी केंद्रों पर होने वाले खर्च और दूसरे शहरों तक आने-जाने की परेशानी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
चिकित्सक और कर्मचारी रहे मौजूद
लोकार्पण कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश कुमार, वित्त नियंत्रक श्रीमती अर्चना त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सरोज कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेंद्र पाल, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एमएल अग्रवाल सहित डॉ. राणा प्रताप, डॉ. जय प्रकाश सिंह, डॉ. देवेश कुमार, डॉ. नैपाल सिंह, डॉ. शबाहत हुसैन, डॉ. पंकज कुमार सिंह, डॉ. ऋषभ नायक और डॉ. पूजा त्रिपाठी पांडेय समेत अन्य चिकित्सक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य डॉ. राजेश कुमार ने वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और सांसद अरुण कुमार सागर के प्रति आभार व्यक्त किया।