विभिन्न मांगों को लेकर बैंक सखी संगठन के बैनर तले सैकड़ों बैंक सखियां सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने अपनी समस्याओं से जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। बैंक सखियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
संगठन की पदाधिकारियों ने बताया कि बैंक सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। जन-धन खाते खुलवाने से लेकर स्वयं सहायता समूहों के सीसीएल कराने और रिकवरी तक की जिम्मेदारी बैंक सखियां निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें वर्तमान में महज तीन हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। बैंक सखियों का कहना है कि मौजूदा महंगाई में इतनी राशि में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है।
20 हजार रुपये मानदेय की मांग
बैंक सखियों ने मानदेय तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की। उनका कहना है कि काम और जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय बढ़ाया जाना जरूरी है, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
इसके साथ ही मानदेय का भुगतान समूह के खाते में किए जाने के बजाय सीधे बैंक सखियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में करने की मांग रखी गई। बैंक सखियों ने कहा कि इससे भुगतान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।
ड्रेस, आईडी कार्ड और लैपटॉप की भी मांग
ज्ञापन में बैंक सखियों ने काम के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इनमें ड्रेस, आईडी कार्ड और कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए लैपटॉप उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। उन्होंने बैंक में खाते खुलवाने, सीसीएल कराने और रिकवरी कराने के कार्य पर अलग से प्रोत्साहन भत्ता देने की भी मांग की। बैंक सखियों का कहना है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए उन्हें उचित प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मांगा
बैंक सखियों ने फील्ड में काम करने के दौरान दुर्घटना की आशंका को देखते हुए सभी बैंक सखियों के लिए 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कराने की मांग रखी। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम के दौरान उन्हें लगातार आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके अलावा बैंक सखियों को बैंकर्स से जोड़ने और बैंक परिसर में बैठने के लिए अलग केबिन अथवा निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की गई। उनका कहना है कि इससे वे सम्मानजनक तरीके से बैंकिंग संबंधी कार्य कर सकेंगी।
15 दिन का समय, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना
बैंक सखी संगठन की अध्यक्ष ने कहा कि सभी बैंक सखियां अगले 15 दिनों तक बैंक में निर्धारित समय के अनुसार अपनी ड्यूटी करती रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक सखियां काम से पीछे नहीं हट रही हैं, बल्कि अपनी जायज मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि 15 दिन के भीतर सरकार ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया तो बैंक सखियां अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगी। इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में बैंक सखियां मौजूद रहीं। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की। जिलाधिकारी ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए बैंक सखियों की मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।