उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र के ग्राम सूथा स्थित शिव मंदिर में रहने वाले दो संतों की हत्या और शव जलाए जाने की घटना को लेकर संत समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सर्वप्रथम परिषद एवं श्री योगी औघड़ अखाड़ा, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में बड़ी संख्या में संत कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां संतों ने प्रदर्शन कर घटना की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग उठाई। बाद में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मामले में सभी आरोपियों और षडयंत्रकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
प्रदेश अध्यक्ष नीरज वाजपेयी और मंडल अध्यक्ष औघड़ प्रमोद नाथ अघोरी के नेतृत्व में संत कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान संतों ने कहा कि सूथा गांव के शिव मंदिर में कई दशकों से रह रहे महंत गोपाल दास और बिहारी दास की हत्या की घटना गंभीर है। संत समाज ने पूरे मामले की गहराई से जांच कर घटना के पीछे की वजह और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने लाने की मांग की।
मंदिर में पूजा कर रहे संतों की हत्या का आरोप
संत समाज के अनुसार, 30 सितंबर 2026 की रात ग्राम सूथा स्थित शिव मंदिर में पूजा-पाठ कर रहे महंत गोपाल दास और बिहारी दास की हत्या कर दी गई। आरोप है कि हत्या के बाद घटना के साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में ही दोनों संतों के शवों को आग के हवाले कर दिया गया।
संतों का कहना है कि तीन अक्टूबर को घटना की जानकारी मिलने के बाद समाज के लोग मौके पर पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले में सुमित सिंह को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया, लेकिन घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
मंदिर और भूमि पर कब्जे की मंशा का लगाया आरोप
प्रदर्शन कर रहे संतों ने आरोप लगाया कि शिव कुमार सिंह, विष्णु सिंह, अमित सिंह और नीलम सिंह समेत कुछ लोगों की मंदिर और उससे जुड़ी भूमि पर कब्जा करने की मंशा थी। संत समाज के अनुसार, पहले मंदिर में रह रहे संतों को कथित तौर पर धमकाकर वहां से हटाने का प्रयास किया गया था। विरोध के बाद संतों ने आरोप लगाया कि हत्याकांड को अंजाम दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। संत समाज ने नामजद किए गए लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
आरोपी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के दावे की जांच की मांग
संत समाज ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे सुमित सिंह को लेकर भी सवाल उठाए। संतों का आरोप है कि उसके परिजन उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर बचाने का प्रयास कर रहे हैं। संतों ने मांग की कि आरोपी की स्थिति समेत परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में जो तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कार्रवाई की जाए।
संत समाज ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
ज्ञापन में संत समाज ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें हत्याकांड की न्यायिक जांच कराने, घटना में शामिल सभी आरोपियों और षडयंत्रकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने, मंदिर और उसकी भूमि को कथित कब्जे से मुक्त कराने और संतों को सौंपने की मांग प्रमुख रही।
इसके अलावा 16 अक्टूबर को प्रस्तावित षोडशी एवं समाधि कार्यक्रम के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। संत समाज ने नामजद लोगों की भूमिका की जांच कर दोष मिलने पर कार्रवाई की मांग भी उठाई।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान संतों ने कहा कि घटना को लेकर संत समाज में गहरा आक्रोश है। यदि मामले में जल्द और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो संत समाज आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। प्रदर्शन और ज्ञापन के दौरान रामदुलारे शर्मा, स्वामी पवन गिरी, स्वामी सत्य पुरी समेत बड़ी संख्या में संत-महात्मा मौजूद रहे।