राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. शेषांक गंगवार ने विद्यार्थियों को तनाव के कारणों, इसके प्रभाव और इससे निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पढ़ाई, करियर, परिवार और भविष्य को लेकर विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उससे निपटना जरूरी है।
डॉ. शेषांक गंगवार ने कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल विद्यार्थियों की एकाग्रता प्रभावित करने के साथ ही मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करने की सलाह दी। कहा कि खाली समय मोबाइल पर बिताने के बजाय पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ बातचीत में लगाया जाना चाहिए।
मन की बात अपनों से साझा करें, तनाव होगा कम
उन्होंने कहा कि तनाव महसूस होने पर खुद को अकेला रखने के बजाय परिवार के सदस्यों या किसी विश्वसनीय मित्र से बातचीत करनी चाहिए। मन में चल रही परेशानियों को दबाकर रखने से समस्या बढ़ सकती है। इसके विपरीत किसी अपने से मन की बात साझा करने से तनाव को कम करने में मदद मिलती है। विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर बातचीत करने के लिए प्रेरित किया गया।
पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या पर दिया जोर
डॉ. गंगवार ने विद्यार्थियों को नियमित दिनचर्या अपनाने, पर्याप्त नींद लेने और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और संतुलित दिनचर्या का मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालना भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि तनाव लगातार बना रहे या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें तो विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समय पर मदद लेना किसी कमजोरी का संकेत नहीं है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य और तनाव से जुड़े विभिन्न सवाल भी पूछे। डॉ. शेषांक गंगवार ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सरल भाषा में जवाब देते हुए तनाव से निपटने के व्यावहारिक तरीके बताए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।