विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को लेखपाल संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर लेखपालों ने सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक कार्य बहिष्कार कर शासन के खिलाफ विरोध जताया। लेखपालों ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज करने की चेतावनी दी।
लेखपाल संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार और महामंत्री तरुण कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लेखपाल तहसील परिसर में एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की और शासन से जल्द समाधान की मांग की।
2800 कैडर पर बहाली समेत कई मांगें
लेखपाल संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि लेखपाल लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लेखपाल संवर्ग को पूर्व निर्धारित 2800 कैडर पर बहाल करना, वेतन विसंगति दूर करना और अंतरमंडलीय स्थानांतरण की व्यवस्था लागू करना शामिल है। इसके अलावा लेखपालों ने वेतन के साथ अन्य भत्ते दिए जाने समेत कई अन्य मांगें भी उठाईं। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें लंबित होने के बावजूद शासन स्तर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लेखपालों में नाराजगी है।
8 अक्टूबर से ऑनलाइन पोर्टलों का बहिष्कार
लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने आंदोलन की अगली रणनीति भी घोषित की। उन्होंने बताया कि आठ अक्टूबर को सभी लेखपाल ऑनलाइन पोर्टलों का बहिष्कार करेंगे। इसके बाद भी यदि शासन की ओर से मांगों का समाधान नहीं किया गया तो 17 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।
लेखपालों ने कहा कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। शासन स्तर से उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा। धरना-प्रदर्शन में तरुण प्रताप सिंह, शिवा गुप्ता, अंशु बाजपेई, आदित्य सिंह चौहान, राजकमल पटेल, बिहारी लाल, चंद्रजीत सिंह, शालिनी शर्मा समेत बड़ी संख्या में लेखपाल शामिल रहे।