प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनते भाजपा सांसद अरुण सागर नजर आए, वहीं दूसरी ओर जिले के कई इलाकों में किसान लगातार बारिश और तेज हवाओं के बीच खेतों में खड़ी अपनी महीनों की मेहनत को बर्बाद होते देख रहे हैं। दो दिनों से जारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में किसानों की नजर अब अपने जनप्रतिनिधियों पर है कि वे खेतों तक पहुंचकर नुकसान का जायजा कब लेते हैं और उनकी समस्या को शासन तक किस तरह पहुंचाते हैं।
लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। कटाई के करीब पहुंच चुकी फसल के खेतों में पानी भरने से किसानों को दोहरी चिंता सताने लगी है। एक ओर फसल गिरने से कटाई में परेशानी होगी, वहीं लंबे समय तक पानी भरा रहने पर फसल के खराब होने और दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
खेतों में बिछी फसल, पानी में डूबी उम्मीद
सदर और ददरौल क्षेत्र में कई स्थानों पर खेतों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। धान की बालियां पानी की चपेट में आ गई हैं। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के समय हुई बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। महीनों तक फसल तैयार करने के बाद अब कटाई से पहले मौसम ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
जलालाबाद और कलान क्षेत्र में भी तेज हवाओं के कारण धान के साथ गन्ने की फसल गिरने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के निचले इलाकों में खेतों में पानी भरने से स्थिति और खराब हो गई है। किसानों को आशंका है कि यदि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो फसल को और नुकसान हो सकता है।
किसानों की नजर जनप्रतिनिधियों पर
बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बीच किसान अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से वास्तविक क्षति का सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कागजी आकलन के बजाय खेतों में पहुंचकर नुकसान देखा जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सांसद अरुण सागर के सामने भी किसानों की ओर से यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह प्रभावित खेतों तक पहुंचकर फसल की स्थिति का जायजा लेंगे। किसान यह भी जानना चाहते हैं कि बारिश से हुए नुकसान का मुद्दा शासन तक पहुंचेगा या नहीं और प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत एवं मुआवजा मिल सकेगा या नहीं।
राहत के लिए सर्वे की जरूरत
लगातार बारिश से किसानों की चिंता केवल फसल के तत्काल नुकसान तक सीमित नहीं है। खेतों में पानी भरे रहने से तैयार धान की फसल के खराब होने का खतरा भी बना हुआ है। गन्ने की फसल गिरने से कटाई और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों की मांग है कि राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित गांवों और खेतों में पहुंचकर फसल क्षति का सर्वे करें। नुकसान का सही आकलन होने के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाए।
बारिश के बीच किसान इस समय किसी आश्वासन या भाषण से ज्यादा अपनी आंखों के सामने बर्बाद हो रही फसल के नुकसान की भरपाई को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से किसानों के नुकसान का कितना जायजा लिया जाता है और राहत की क्या कार्रवाई होती है, इस पर किसानों की नजर रहेगी।