उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुरमें पिछले कई घंटों से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तेज हवा के साथ हुई बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिर गए। कुछ जगहों पर दीवारें गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। तेज हवा के झोंकों से कई लोगों के टीनशेड उड़ गए। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में रास्तों पर कीचड़ और जलभराव होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों की फसलों पर दिखाई दे रहा है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। कई खेतों में पानी भर जाने से फसलें जलमग्न हो गई हैं। वहीं तेज हवा के कारण कुछ स्थानों पर गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। तिलहन की फसल भी पानी में डूबने लगी है। धान के खेतों में जलभराव होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
पानी नहीं निकला तो बढ़ सकता है नुकसान
किसानों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो फसलों की उपज प्रभावित हो सकती है। लगातार पानी भरे रहने से फसलों को नुकसान होने की आशंका है। गन्ने की फसल गिरने से किसानों के सामने कटाई और उत्पादन से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कई खेतों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और फसलें पानी में डूबी नजर आ रही हैं। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो खेतों में खड़ी फसलों को और नुकसान पहुंच सकता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कच्चे मकानों और कमजोर दीवारों को भी खतरा
लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों और कमजोर दीवारों वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। कुछ स्थानों पर दीवारें गिरने की घटनाएं सामने आने के बाद लोग एहतियात बरत रहे हैं। तेज हवा के कारण टीनशेड उड़ने से भी लोगों को परेशानी हुई है।बारिश के चलते गांवों के संपर्क मार्गों पर कीचड़ और पानी जमा होने से लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नुकसान का जायजा लेने की मांग
मौसम के बदले मिजाज ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। किसानों और ग्रामीणों ने जलभराव वाले खेतों एवं इलाकों में पानी निकासी की व्यवस्था कराने के साथ ही फसलों और अन्य नुकसान का जायजा लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते पानी की निकासी और क्षति का आकलन कराया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत मिल सके।