जिला कारागार में रविवार को भारत सरकार के उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता आकलन परीक्षा (FLNAT) आयोजित की गई। परीक्षा में जेल में निरुद्ध 35 बंदियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में अवसर उपलब्ध कराना है।
कारागार में निरुद्ध रहने के दौरान बंदियों को नियमित रूप से पढ़ने-लिखने के साथ ही प्रारंभिक गणित का ज्ञान दिया गया। शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से बंदियों ने अक्षर और अंक ज्ञान हासिल किया। इसके बाद उनकी बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता का आकलन करने के लिए FLNAT परीक्षा कराई गई।
शिक्षा से आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर
परीक्षा से पहले कारागार अधीक्षक जेपी तिवारी ने परीक्षार्थी बंदियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है। शिक्षा से व्यक्ति के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में वृद्धि होती है तथा बेहतर भविष्य के निर्माण की क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने बंदियों से शिक्षा का सिलसिला आगे भी जारी रखने का आह्वान किया। अधीक्षक ने कहा कि कारागार में शिक्षा केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदियों के सुधार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सफल बंदियों को मिलेगा प्रमाण-पत्र
परीक्षा में सफल होने वाले बंदियों को संबंधित मंत्रालय की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। इससे बंदियों को अपनी शिक्षा आगे बढ़ाने और समाज में पुनर्वास के दौरान नए अवसर हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कारागार प्रशासन के अनुसार परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। 35 बंदियों की भागीदारी को जेल में संचालित साक्षरता गतिविधियों के प्रति उनके उत्साह के रूप में देखा गया। शिक्षा के माध्यम से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास आगे भी जारी रखने पर जोर दिया गया।