विरोध शुरू, यूपीपीसीएल ने कहा-कोई नया आदेश नहीं, 2025 से चली आ रही प्रक्रिया
जागरण टुडे, लखनऊ। दूध, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद अब बिजली की दरें भी बढ़ाई जा रही हैं। यह यूपी में चल रहे बिजली संकट के बीच उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका है। यूपीपीसीएल ने फ्यूल सरचार्ज 10 प्रतिशत का इजाफा किया है।
बता दें कि मार्च महीने की 10 प्रतिशत बकाया वसूली इस बार जून में की जाएगी। यूपीपीसीएल के इस निर्णय के बाद चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। जहां उपभोक्ता परिषद ने प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है, वहीं विपक्षी दलों ने सरचार्ज को वापस लेने का दबाव बनाया है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अब तक का सबसे अधिक फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया है।
अब प्रति 100 रुपये के बिजली बिल पर यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को 10 रुपये अतिरिक्त चुकाना होगा। ये सरचार्ज हर महीने बिजली के बिल में लगकर आएगा। इस बार ये शुल्क 10 प्रतिशत आएगा अर्थात जून का बिल ज्यादा चुकाना होगा। अधिकारियों के मुताबिक यह कोई नया आदेश नहीं है, बल्कि जनवरी 2025 से चली आ रही एक प्रक्रिया है। बढ़ोतरी मार्च 2026 महीने के लिए 10% ‘फ्यूल एंड पावर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज'' के कारण है, जिसे जून 2026 के बिल में जोड़ा जाएगा। यूपी विद्युत नियामक आयोग ने 08 जनवरी 2025 को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से यह नियम बनाया था कि किसी एक महीने का एफपीपीएएस चौथे महीने के बिल में जोड़ा जाएगा।
उपभोक्ता परिषद ने की मुख्यमंत्री से खरीद प्रक्रिया के जांच की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के फैसले का विरोध करते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर बिजली खरीद प्रक्रिया की जांच कराने की अपील की है। परिषद का आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन पिछले दो वर्षों के लगभग 1400 करोड़ रुपये के बकाए की वसूली भी फ्यूल सरचार्ज के माध्यम से करने की तैयारी कर रहा है।
विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में वास्तविक बिजली खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट स्वीकृत की गई थी, जबकि मार्च 26 में पावर कॉरपोरेशन ने लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाते हुए उपभोक्ताओं पर करीब 1,610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार डाल दिया।
परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मांग की है कि मार्च 26 में महंगी बिजली किन परिस्थितियों में और किन निजी बिजली उत्पादक कंपनियों से खरीदी गई, इसकी विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस पहले से मौजूद है। ऐसे में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।