बदायूं जिले के दातागंज क्षेत्र स्थित प्राचीन छछऊ धाम में इस वर्ष भी आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब हजारों श्रद्धालुओं ने मिलकर भव्य कलश यात्रा निकाली। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों के साथ-साथ आसपास के कई जनपदों से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
कलश यात्रा का शुभारंभ छछऊ धाम से हुआ, जो बिहारीपुर, पापड़, डहरपुर, डोलापुर सहित कई गांवों से होकर गुजरी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ भक्ति गीत गाते हुए आगे बढ़ते रहे। विशेष रूप से महिलाओं और माताओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जो सिर पर कलश लेकर श्रद्धा और अनुशासन के साथ यात्रा में शामिल हुईं।
धाम के पुजारी मुकेश प्रजापति ने जानकारी देते हुए बताया कि छछऊ धाम अत्यंत प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां हर वर्ष इस प्रकार की विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य बना दिया।
कलश यात्रा के समापन के बाद सात दिनों तक चलने वाली रासलीला का शुभारंभ हुआ। इस दौरान क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दूर-दूर से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही पूरे आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
इस धार्मिक आयोजन में कासगंज, शाहजहांपुर, संभल सहित कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचे, जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई। कथरा खगेई, मल्लाहपुर, फतेहपुर, अहोरामई, गंगपुर, दातागंज, मुड़सेना, सकतपुर, गुलड़िया सहित अनेक गांवों के लोगों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।
कलश यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में पुलिस प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दातागंज कोतवाली के प्रभारी वेदपाल सिंह ने अपनी टीम के साथ सुरक्षा व्यवस्था को संभाला और पूरे कार्यक्रम को सकुशल संपन्न कराया। उनके नेतृत्व में पुलिस बल पूरे मार्ग पर तैनात रहा, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी गई।
समग्र रूप से यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी सुदृढ़ करने का माध्यम साबित हुआ। छछऊ धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आज भी लोगों की आस्था और विश्वास अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है।