जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद के पटियाली क्षेत्र का बहुचर्चित सर्राफा व्यापारी अपहरण और अवैध वसूली प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पीड़ित व्यापारी अजय कुमार वर्मा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। साथ ही, पूरे मामले की विवेचना की निष्पक्षता पर भी बड़े सवाल उठने लगे हैं। अब इस प्रकरण में सीबीसीआईडी जांच की मांग तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित के अनुसार, 20 जुलाई 2025 की रात उसे कथित रूप से अगवा कर थाना पटियाली ले जाया गया, जहां पुलिसकर्मियों ने दबाव बनाकर उससे 50 हजार रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवरात छीन लिए गए। आरोप है कि इसके बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया और उसी रात परिजनों व परिचितों से उधार मंगवाकर करीब 3 लाख रुपये और वसूले गए। रकम मिलने के बाद ही उसे छोड़ा गया। इस घटना से व्यापारी मानसिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
नामजद अफसरों को ‘अज्ञात’ बनाने का आरोप
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब पीड़ित की तहरीर में नामजद किए गए तत्कालीन थाना प्रभारी रामवकील सिंह और एसओजी प्रभारी विनय शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए गए। आरोप है कि उन्हें जानबूझकर ‘अज्ञात’ की श्रेणी में डाल दिया गया। वर्तमान विवेचना में भी इन नामों को बाहर रखने की कोशिशें जारी होने की बात कही जा रही है।
कार्रवाई पर उठे सवाल, छोटे कर्मियों पर गिरी गाज
गोपनीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इनमें से सिपाही सोवरन सिंह और पवन को जेल भेजा गया, लेकिन अन्य आरोपित पुलिसकर्मियों इंस्पेक्टर रामवकील सिंह और विनय शर्मा को बहाल कर दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब तक न तो वसूली गई रकम बरामद हुई है और न ही जेवरात का कोई सुराग मिला है, जिससे जांच की पारदर्शिता पर संदेह गहरा गया है।
वर्तमान पतियाली थाने मे तैनाती से बढ़ी असुरक्षा
अब पीड़ित अजय वर्मा ने डीजीपी से मुलाकात कर आरोप लगाया है कि जिन पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप हैं, उन्हें जिले से बाहर भेजने के बजाय स्थानीय थानों में ही तैनात रखा गया है। इतना ही नहीं, एक अन्य आरोपित प्रेम पाल को हाल ही में थाना पटियाली का प्रभारी बनाए जाने से परिवार में भय का माहौल है। पीड़ित का कहना है कि उसे मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है और इनकार करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी जा रही है।
DGP सख्त, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने संबंधित अधिकारियों से 15 दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। पीड़ित ने साफ तौर पर कहा है कि उसे स्थानीय पुलिस या वर्तमान अलीगढ मे तैनात विवेचना अधिकारी से न्याय की उम्मीद नहीं है, इसलिए इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी या सीबीसीआईडी को सौंपी जानी चाहिए।