जागरण टुडे, गुड्डू यादव कासगंज।
भारतीय किसान यूनियन (स्वराज गुट) के नेता सुरजीत पांडेय को सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। सत्र न्यायाधीश रामेश्वर की अदालत ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से दाखिल हलफनामे (एफिडेविट) ने मामले को नया मोड़ दे दिया।
शुक्रवार को सत्र न्यायाधीश रामेश्वर की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। अदालत कक्ष में दोनों पक्षों के समर्थकों और अधिवक्ताओं की उपस्थिति के चलते माहौल काफी गंभीर रहा। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता केशव मिश्रा ने विस्तृत दलीलें पेश कीं। उन्होंने न्यायालय को बताया कि वादी कौशल किशोर, निवासी ग्राम गिलौरी थाना गंजडुंडवारा, ने शपथपत्र देकर स्पष्ट किया है कि उससे किसी प्रकार की रंगदारी नहीं मांगी गई थी।
हलफनामे में वादी ने यह भी उल्लेख किया कि वह स्वयं भाकियू (स्वराज गुट) से जुड़ा रहा है। उसके अनुसार पुलिस ने उसे थाने बुलाकर दबाव बनाया और एक लिखित प्रार्थना पत्र तैयार कर हस्ताक्षर करा लिए। इसके आधार पर सुरजीत पांडेय और उनके भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब स्वयं वादी रंगदारी की घटना से इनकार कर रहा है, तो अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरजीत पांडेय की जमानत मंजूर कर ली।
न्यायालय ने आदेश दिया कि आरोपी को एक-एक लाख रुपये के दो जमानती और एक व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित शर्तों की पूर्ति के बाद उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
जमानत मिलने की सूचना के बाद भाकियू (स्वराज गुट) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। संगठन के नेताओं ने इसे सत्य की जीत बताते हुए न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। वहीं, मामले को लेकर जनपद में चर्चा का माहौल बना हुआ है।