साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “ब्रजभाषा पाटोत्सव समारोह” साहित्य और संस्कृति का भव्य संगम बन गया। समारोह में ब्रज भाषा के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को प्रतिष्ठित “ब्रजभाषा विभूषण” उपाधि से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कोऑर्डिनेटर एवं पत्रकार चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, लेखिका डॉ. अनीता चौधरी, वृंदावन के डॉ. बृजभूषण चतुर्वेदी, गोपाल कृष्ण दुबे तथा नंदगांव के लोकेश गोस्वामी को “ब्रजभाषा विभूषण” से अलंकृत किया गया। इसके अलावा मथुरा के शिक्षक राजेंद्र केशोरैया, श्रीमती देवकी, चित्रकार सुश्री उमा शर्मा तथा लेखक देवी प्रसाद गौड़ को विभिन्न मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान साहित्यिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। डॉ. अनीता चौधरी ने ब्रजभाषा में काव्य पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं रिचा रावत (राया) और चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने अपने आलेख प्रस्तुत किए। समस्या-पूर्ति कार्यक्रम में सत्य प्रकाश शर्मा (वृंदावन) और अंजीव अंजुम (राया) सहित अन्य साहित्यकारों ने सहभागिता निभाई और ब्रजभाषा की समृद्ध परंपरा पर विचार रखे।
साहित्य मंडल नाथद्वारा के सचिव श्याम प्रकाश देवपुरा ने कहा कि ब्रज के साहित्य मनीषियों द्वारा भाषा संरक्षण के लिए की जा रही सेवाएं अत्यंत प्रेरणादायक और अनुकरणीय हैं। उन्होंने ब्रजभाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
पाटोत्सव के दौरान कई नव प्रकाशित पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। डॉ. अनीता चौधरी के कहानी संग्रह “काश, मैं गरीब होती” तथा चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार की पुस्तक “स्वाधीनता के समाजवादी स्वर (राजस्थान के क्रांतिकारियों की संघर्ष गाथा)” का विमोचन हुआ। साथ ही कपिल उपाध्याय की पुस्तक “ब्रज की स्थापत्य कला विलुप्ति की ओर” साहित्य मंडल को भेंट की गई।