शहर के एक बड़े कारोबारी परिवार में संपत्ति विवाद का मामला सामने आया है। बड़े भाई पर छोटे को शराब में धीमा जहर देने, इलाज के बहाने ले जाकर बेहोशी की हालत में उसकी संपत्ति अपने नाम कराने का आरोप है। इसका मुकदमा दर्ज कराने पर आरोपियों ने पीड़िता और उसकी मां का अपहरण कर गाजियाबाद में बंधक बना लिया, उनके साथ मारपीट की। साथ ही जान से मारने की धमकी देकर कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली में दर्ज एफआईआर के अनुसार, रियांशी पल्तानी निवासी मिशन चौराहा ने बताया कि वह अपने पिता स्वर्गीय अमित पल्तानी, मां और भाई के साथ रहती थी। उसके पिता का डबल नाइन और सुपर डबल नाइन तंबाकू रेडीमेड का कारोबार था। रियांशी के ताऊ संजय पल्तानी गाजियाबाद में प्रिंटिंग प्रेस का व्यवसाय करते थे। कथित तौर पर व्यवसाय में भारी नुकसान और अपनी जान को खतरा बताकर संजय कासगंज आ गए। भाई होने के नाते अमित पल्तानी ने उन्हें अपने घर में रहने की अनुमति दे दी।
आरोप है कि इसी दौरान संजय पल्तानी ने साजिश के तहत अपने छोटे भाई अमित को शराब में धीमा जहर देना शुरू कर दिया। अमित की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था। इलाज के बाद जब वे घर लौटे तो उनकी लीवर और किडनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। 27 सितंबर 2023 को अमित की हालत अत्यंत गंभीर हो गई। आरोप है कि संजय पल्तानी ने डॉक्टर को दिखाने का बहाना बनाकर अपने चालक संजीव चौहान की मदद से उन्हें गाड़ी में लिटाया, लेकिन डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय तहसील पहुंचा दिया। वहां अमित की बेहोशी की हालत में फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा निशानी लेकर संपत्ति का बैनामा अपने नाम करा लिया और उन्हें घर छोड़ दिया।
इसके बाद अमित की हालत और बिगड़ गई। परिजनों ने संजय को तलाशा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। अंततः अमित को दिल्ली ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। 3 अक्टूबर 2023 को उनका अंतिम संस्कार किया गया। उसी दिन तहसील में पूछताछ करने पर परिजनों को संपत्ति के फर्जी बैनामे की जानकारी मिली, जिसको लेकर मुकदमा विचाराधीन है।
रियांशी ने आगे बताया कि 11 अक्टूबर 2025 को वह अपनी मां के साथ सुबह करीब 11 बजे सामान लेने जा रही थी। तभी संजय पल्तानी, उसकी पत्नी हेमा पल्तानी, बेटा शुभम और चालक संजीव चौहान एक टोयोटा इनोवा कार से आए और जबरन दोनों मां-बेटी को गाड़ी में बैठाकर गाजियाबाद ले गए। वहां उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा गया, मारपीट की गई और अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी गईं। आरोप है कि मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया गया और जान से मारने की धमकी देकर कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। बाद में शर्तों के साथ दोनों को कासगंज छोड़ दिया गया।
किसी तरह बचकर कोतवाली पहुंची रियांशी ने पूरी घटना पुलिस को बताई। पुलिस ने ताऊ संजय पल्तानी, ताई हेमा पल्तानी, चचेरा भाई शुभम, चालक संजीव चौहान और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, अश्लीलता और धमकी सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।