शास्त्रीय परंपराओं, वेदों और श्रुतियों में धनु संक्रान्ति का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया गया है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ आरंभ होने वाला यह पर्व लौकिक एवं अलौकिक फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इसी पावन अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा 16 दिसंबर 2025 से श्रीकृष्ण-जन्मभूमि परिसर में भव्य खिचड़ी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जो संपूर्ण पौष मास तक श्रद्धा और भक्ति के साथ चलेगा।
इस संबंध में जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा ने बताया कि धनु संक्रान्ति के दिन प्रातः 8:00 बजे से श्रीकृष्ण-जन्मभूमि स्थित अन्नक्षेत्र में खिचड़ी महोत्सव का शुभारंभ होगा। महोत्सव के दौरान श्रीठाकुरजी को विशेष भोग अर्पित कर उसका प्रसाद भक्तों को वितरित किया जाएगा। प्रसाद स्वरूप विभिन्न दालों, मेवों एवं शुद्ध गाय के घी से निर्मित दिव्य खिचड़ी, तिल से बनी रेबड़ी, गजक सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन सभी श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराए जाएंगे।
कपिल शर्मा ने बताया कि यह महोत्सव केवल प्रसाद वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय परंपरा, सेवा और समर्पण की भावना को भी सशक्त किया जाएगा। धनु संक्रान्ति पर गौसेवा का विशेष महत्व होने के कारण श्रीकृष्ण-जन्मभूमि प्रांगण स्थित गौशाला में गायों के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। यहां गायों को पौष्टिक चारा, गुड़-तिल के लड्डू, गुड़ का दलिया तथा अन्य सुपाच्य एवं पोषक आहार अर्पित किया जाएगा।
खिचड़ी महोत्सव के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन के साथ-साथ प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि मथुरा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी और अधिक गौरव प्रदान करेगा।