कादरचौक कस्बे में मंगलवार को एक दर्दनाक और संवेदनशील घटना सामने आई, जिसने स्थानीय लोगों को गहरी व्यथा में डाल दिया। कस्बे के एक मोहल्ले में आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक एक बंदर पर हमला कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बंदर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाकर कुत्तों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
घटना की जानकारी जैसे ही कस्बे में फैली, निवासी दीपू जौहरी अपने साथियों शिवम कुमार, दानिश, दीपक सक्सेना और सत्यम कुमार के साथ मौके पर पहुँचे। सभी ने मिलकर मृत बंदर के पार्थिव शरीर को सुरक्षित उठाया और अंतिम संस्कार की तैयारियां कीं। ग्रामीणों ने पूर्ण सम्मान के साथ बंदर का अंतिम संस्कार कर मानवता, पशु संवेदना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कस्बे में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कुत्तों के झुंड अक्सर गलियों में घूमते देखे जाते हैं, जिसके कारण न सिर्फ पशुओं पर हमले हो रहे हैं, बल्कि बच्चों और राहगीरों के लिए भी खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ प्रशासन की अनदेखी का परिणाम हैं, इसलिए समय रहते नियंत्रण आवश्यक है।
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ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन से आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और नियंत्रण अभियान को तत्काल शुरू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सुरक्षित वातावरण का निर्माण सभी की जिम्मेदारी है।
घटना के बाद कस्बे में लोगों के बीच पशु सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ती नजर आई। ग्रामीणों का कहना है कि समाज तभी श्रेष्ठ बन सकता है जब इंसान हर जीव के प्रति करुणा और दया का भाव रखे।