संजय श्रीवास्तव, बरेली
लाखों लोगों की आस्था का केंद्र अलखनाथ मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। अलखनाथ मंदिर को केंद्र बिंदु मानकर बरेली में काशाी और अयोध्या की तर्ज पर 231 करोड़ रुपये की लागत से नाथ कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे बरेली को नई पहचान मिल सके। कानूनी अड़ंगा फंसने से अलखनाथ मंदिर के सौंदर्यकरण का कार्य रुक गया है। दरअसल नाथ कॉरिडोर निर्माण में अड़ंगा फंसाने वाला एक कथित हिंदू नेता है, जो दूसरे समुदाय के लोगों को मोहरा बनाकर खुद अलखनाथ के सामने की बेशकीमती जमीन को हथियाना चाहता है। नाथ कॉनिडोर का निर्माण रुकने का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा तो स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी ने सदर तहसील प्रशासन और पर्यटन विभाग से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। उधर, अलखनाथ मंदिर के साधुओं ने भी कॉरिडोर निर्माण रुकवाने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
231 करोड़ रुपये से किया जा रहा कॉरिडोर का निर्माण
लगभग 36 किलोमीटर लंबा नाथ कॉरिडोर शहर के सात पौराणिक मंदिरों अलखनाथ, त्रिवटी नाथ, मणीनाथ, तपेश्वर नाथ, धोपेश्वर नाथ, पशुपतिनाथ और वनखंडी नाथ को जोड़ेगा। बरेली में नाथ नगरी कॉरिडोर बनाने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में मंजूरी दे दी थी। बरेली विकास प्राधिकरण ने करीब 231 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। प्रदेश शासन से डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद कॉरिडोर के बड़े निर्माण शुरू कर दिए। कॉरिडोर के अंतर्गत 7 प्रमुख नाथ मंदिरों को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण पीडब्ल्यूडी को करना है। इससे जुड़ने वाले सातों नाथ मंदिरों में सौंदर्यकरण संबंधी निर्माण कार्य पर्यटन विभाग करा रहा है।
नाथ मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर खर्च किए जाएंगे 66.6 करोड़ रुपये
कॉरिडोर से जुड़ने वाले सातो नाथ मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर 66.6 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नाथ नगरी कॉरिडोर में अलखनाथ, त्रिवटीनाथ और बनखंडी नाथ मंदिर में वैदिक पुस्तकालय बनेगा, जिसमें वेद पुराण उपनिषद एवं पौराणिक ग्रंथ रखे जाएंगे। सौंदर्यकरण के तहत सातों नाथ मंदिरों में एक मल्टीपरपज हाल बनेगा, जिसमें भंडारा, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक कार्यों की व्यवस्था रहेगी। प्रथम तल पर ढाई सौ लोग एक साथ सत्संग, श्री शिव महापुराण और कथा आदि कर सकेंगे। इसके अलावा फूल और प्रसाद बेचने वालों के लिए दुकानें भी बनेंगी।
मंदिर के सामने सड़क किनारे गाटा संख्या 735 जमीन पर मुस्लिम परिवार ने ठोंका दावा
शहर का सबसे प्राचीन शिव मंदिर अलखनाथ के आसपास जमीन खाली पड़ी है। मंदिर के मुख्य द्वार के सामने वाली सड़क किनारे गाटा संख्या 735 जमीन को जटवारा मोहल्ला निवासी जमील पुत्र अच्छन और उनके परिवार के लोग अपनी होने का दावा कर रहे है। जमील ने बरेली के अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से स्थगनादेश भी हासिल कर लिया है, जो कल 18 नवंबर मान्य है। कोर्ट का स्थगनादेश आने से अलखनाथ मंदिर के सामने फूल-प्रसाद की दुकानों आदि निर्माण कार्य रुक गया है। निर्माण कार्य रुकने से प्रशासन और पर्यटन विभाग परेशान है।
अलखनाथ मंदिर के आसपास जमीन की कीमतें बढ़ीं तो सक्रिए हुए माफिया
जानकार सूत्रों के अनुसार नाथ कॉरिडोर का निर्माण और अलखनाथ मंदिर के सौंदर्यकरण का काम शुरू होने के साथ मंदिर के आसपास जमीन की कीमतें आसमान पर पहुंच गई। कीमत बढ़ी तो माफिया सक्रिय हो गए और उन्होंने वहां की जमीनों की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया। खोजबीन के दौरान अलखनाथ मंदिर सामने सड़क किनारे गाटा संख्या 735 जमीन जटवारा मोहल्ले के जमील की होने का पता चला, जिसकी कीमत करोड़ों में होगी। जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके जमील शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हैं, जिससे उन्हें चलना फिरना भी मुश्किल है। चूंकि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन उन्हीं के नाम है, जिससे स्टे ऑर्डर भी जमील के नाम पर लिया गया है।
उधर, कथित हिंदू नेता का दावा है कि उन्होंने इस जमीन को करीब एक साल पहले 90 लाख रुपये में खरीदा था, जिसका उन्होंने एग्रीमेंट भी करा लिया है। जिस जमीन को मंदिर की बताया जा रहा है वह जमील की पैतृक जमीन है। राजस्व रिकॉड में भी उनका नाम दर्ज है। अदालत से कल 18 नवंबर तक का स्थगनादेश है, जिसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
अलखनाथ मंदिर के साधुओं ने खोला मोर्चा
बरेली। अलखनाथ मंदिर के आसपास की जमीन अपनी बताकर दूसरे समुदाय के लोगों ने नाथ कॉरिडोर का काम रुकवाने को लेकर तपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाड़ा से जुड़े संतों ने मोर्चा खोल दिया है। अलखनाथ मंदिर प्रबंधन के अनुसार मुख्य गेट के भीतर वाईं ओर समाधि स्थल, फूलों के बगीचे और अमरूद-आम बागान के पास (गाटा संख्या 735 व 736/944) पर्यटन विभाग प्रसाद, फूलों दुकानें एवं शौचालय का निर्माण करा रहा है। इससे पहले यहां नगर निगम द्वारा बनाई गई धर्मशाला और बाबा पवन गिरी का धूना बना था। जिसे पर्यटन विभाग ने हटाकर नया निर्माण शुरू किया था।
मंदिर प्रबंधन बोला- कागजों में फजी तीरके से दर्ज कराया नाम
मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह भूमि सदियों से अलखनाथ बाबा के कब्जे में है और खसरा में भी “बाबा अलखनाथ की झाड़ियां”दर्ज हैं। वर्ष 1965 में चुन्ना मियां द्वारा इस जमीन को लेकर दायर मुकदमा 1970 में खारिज हो चुका है। अपील भी 1977 में मंडलायुक्त बरेली द्वारा खारिज कर दी गई थी। बाद में राजस्व कोर्ट में दायर वाद भी वापस हो गया था। खतौनी में पुराने आदेश दर्ज न होने का नाजायज लाभ उठाकर वर्ष 2015 में फर्जी तरीके से दाखिल खारिज करा दिया गया। अलखनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष महंत कालू गिरि ने जिला प्रशासन से कागज़ों की जांच कराने, अवैध रूप से निर्माण रुकवाने पहुंचे लोगों पर सख्त कार्रवाई करने और नाथ कॉरिडोर निर्माण में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर करने की मांग की है।