बदायूं जनपद के मूसाझाग क्षेत्र में गुरुवार को भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक महापर्व भैया दूज बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांवों में त्योहार की रौनक छाई रही। बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।
क्षेत्र के गगपुर, तिगुलापुर, महरोली, मैनिकापुर, कौर, हथिनीभूड़, मौसमपुर, हसनपुर, मझारा, कथरा, खगेई, नगर पंचायत गुलड़िया, मचलई, वेला सहित सैकड़ों गांवों में यह पर्व परंपरागत उल्लास के साथ मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में बहनों ने पूजा के लिए विशेष थाल सजाए, जिनमें चंदन, सिंदूर, फल, मिठाई और दीप रखे गए। वे भाइयों की आरती उतारते हुए भगवान विष्णु से उनके दीर्घ जीवन और सफलता की प्रार्थना करती देखी गईं।
त्योहार की सबसे विशेष बात यह रही कि छोटे-छोटे बच्चे भी परंपरा निभाने में पीछे नहीं रहे। बहनों ने अपने भाइयों को तिलक लगाने के बाद मिठाई खिलाई और राखी की तरह इस रिश्ते की पवित्रता को दोहराया। बदले में भाइयों ने बहनों को कपड़े, मिठाई, पैसे और उपहार भेंट कर उनके प्रति प्रेम और आभार जताया।
मूसाझाग क्षेत्र में यह त्योहार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक भी माना जाता है। सभी वर्गों और समुदायों की बहनों ने एक साथ इस पर्व को मनाकर भाई-बहन के अटूट बंधन को और मजबूत किया। गांवों की गलियों में रौनक, हंसी-खुशी और उल्लास का माहौल बना रहा।
बहनों ने बताया कि वे इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं। पूरा वर्ष बीतने के बाद जब भैया दूज आती है, तो यह उनके लिए भाई की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना का अवसर बन जाती है।
भैया दूज पर्व ने मूसाझाग क्षेत्र में भाई-बहन के रिश्ते को फिर एक बार प्रेम, अपनत्व और सांस्कृतिक गौरव से सराबोर कर दिया।