पांच दिनों तक चलने वाला दीपावली त्योहार पर हर घर और प्रतिष्ठान चायनीज झालरों से जगमग होगा। गरीब की झोपड़ी हो या अमीर का बंगला सभी रंग-बिरंगी रोशनी में नहाए नजर आएंगे। हालांकि इस बार बाजार में लोकल फॉर वोकल आइटम भी मौजूद हैं। पहले इतने फैंसी कंडील और झूमर आदि नहीं होते थे, लेकिन अबकी विभिन्न प्रकार के कंडील बाजार में मौजूद हैं। कंडील बाजार में गुजरात छाया हुआ है।
अगर आपकी जेब में 20 से 25 रुपये भी हैं तो आप 15 मीटर वाली झालर खरीद सकते हैं। ये आइटम गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बनाए गए हैं। हालांकि बाजार में झालर 300 रुपये तक की की उपलब्ध है। यानी झालर की कीमत लंबाई के अनुसार है। अगर यह कहें कि जो अमीर है वो फैंसी और लंबी झालर खरीद रहे हैं। झालर के रूप में मोमवत्ती, दीपक, मटका और कई आइटमों की भरमार बाजार में है। आइटम ज्यादा महंगे न होने की वजह से इलेक्ट्रिक आइटमों की मांग अधिक है, लेकिन जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आ रही है विभिन्न आइटमों की मांग बढ़ती जा रही है, उसके अनुपात में दामों में बढ़ोतरी हो रही है।
LED झालरों की मांग में उछाल
बाजार में मल्टीकलर LED झालरों की भरमार है। एक मीटर से लेकर 80 मीटर तक की झालरें उपलब्ध हैं। कीमत 80 रुपये से शुरू होकर 300 रुपये तक जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब “रिमोट कंट्रोल” और “सोलर पावर” वाली झालरों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
गुजराती कंडीलों की रौनक
झालरों के साथ-साथ गुजराती कंडीलों (लटकन लैंप) ने भी बाजार की रौनक बढ़ा दी है। रंग-बिरंगे कंडील 200 रुपये से 600 रुपये तक के दामों में उपलब्ध हैं। कुछ दुकानों में हैंडमेड पेपर और कपड़े से बने विशेष डिजाइनर कंडील भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
मिट्टी के दीये और मूर्तियां सजीं दुकानों में
मिट्टी के दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों और पारंपरिक आर्ट वर्क की दुकानों पर भी भीड़ उमड़ रही है। इस बार स्थानीय कुम्हारों ने नए डिजाइनों में दीये तैयार किए हैं। लोग प्लास्टिक या धातु के दीयों की बजाय पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सस्ती चायनीज झालरों का दबदबा
हालांकि, देसी LED झालरें और कंडीलों की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन सस्ती कीमत के कारण चायनीज झालरें अब भी बाजार में सबसे ज्यादा बिक रही हैं। 20 से 100 रुपये तक की इन झालरों की कीमत आम लोगों के बजट में होने से इनकी बिक्री सबसे आगे है।