श्री नारायण दास ट्रस्ट के तत्वावधान में राजा जयसिंह सेव्य ठाकुर गोपालजी मंदिर परिसर में पारंपरिक सांझी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ लोक साहित्यकार डॉ. सीमा मोरवाल ने किया। उत्सव का शुभारंभ जिला विकास अधिकारी गरिमा खरे और गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। शंख वादक श्याम सोनी के शंखनाद ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सांझी कला के महत्व और इसके संरक्षण पर विचार व्यक्त किए। डा. नटवर नागर ने सांझी को ब्रज की पहचान बताया। डॉ. नीतू गोस्वामी ने कहा कि पशुपालक और कृषक समाज में सांझी देवी की उपासना प्राचीन परंपरा का हिस्सा रही है। वहीं डॉ. करुणेश उपाध्याय ने इसे संगीत, साहित्य और कला का अद्भुत संगम कहा। गोपाल शर्मा ने बताया कि सांझी कृष्णकालीन धरोहर है, जिसका उल्लेख 15वीं शताब्दी के साहित्य में मिलता है।
इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा युवा कलाकारों विभु कृष्ण भट्ट, ईशान गौड़ और अनन्या ठाकुर को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि गरिमा खरे ने सांझी को समरसता की देवी बताते हुए कहा कि मातृशक्ति की उपासना हमारी सनातन परंपरा है। वहीं भाजपा की पूर्व जिला अध्यक्ष मधु शर्मा ने कहा कि सांझी ग्रामीण समाज में प्रेम और एकता का प्रतीक है।
उत्सव में विविध रूपों की सांझी प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रही। समिति के प्रवक्ता श्याम शर्मा ने कहा कि सांझी केवल कला ही नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली परंपरा है। ऐसे उत्सव लोककलाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में ट्रस्ट पदाधिकारी मनीष अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन कर मंदिर की प्राचीनता और ट्रस्ट की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डॉ. अशोक अग्रवाल, मुकेश धनगर, विजय विद्यार्थी, डॉ. रश्मि शर्मा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।