उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों का आंदोलन तेजी पकड़ चुका है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने बेसिक शिक्षकों की नींद उड़ा दी है, और दो शिक्षकों के आत्महम्या कर लेने से योगी सरकार भी दबाव में दिखाई देने लगी है। मंगलवार 16 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षक सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।
प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता हरीश बाबू शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन सेवा बचाने और भविष्य सुरक्षित रखने की लड़ाई है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में हजारों शिक्षक आंदोलन में शामिल हैं। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि टेट अनिवार्यता केवल नए नियुक्तियों पर लागू हो। पहले से कार्यरत शिक्षकों को टेट मुक्त किया जाए। उनका कहना है कि कोई भी कानून पिछली तारीख से लागू नहीं हो सकता।
दरअसल, 01 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी शिक्षकों को अगले दो वर्षों में टेट पास करना होगा, वरना उन्हें सेवा से हटा दिया जाएगा। केवल वही शिक्षक बचे रहेंगे जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय है। इस आदेश के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में गुस्सा और भय फैल गया है। हालात इतने बिगड़े कि खबरों के मुताबिक दो शिक्षकों ने आत्महत्या कर ली। आंदोलनरत शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनके साथ अन्याय है और उन्हें मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा है।
शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने योगी सरकार से मांग की कि वह जल्द से जल्द केंद्र से बात कर शिक्षकों को राहत दिलाए। इस पूरे मामले ने न सिर्फ प्रदेश बल्कि देशभर में लाखों शिक्षकों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें सरकार और कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।