एजेंसी। भारतीय मुक्केबाजों ने विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए विदेशी सरजमीं पर इतिहास रच दिया। जैसमीन लंबोरिया (57 किग्रा) और मीनाक्षी हुड्डा (48 किग्रा) ने अपने-अपने वर्ग में खिताब जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जबकि नुपूर शेरोन (80+ किग्रा) ने रजत और पूजा रानी (80 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।
जैसमीन की सुनहरी जीत
तीसरी बार विश्व चैंपियनशिप में उतरी 24 वर्षीय जैसमीन ने पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता पोलैंड की जूलिया जेरेमेटा को 4-1 से हराया। फाइनल में शानदार वापसी करते हुए उन्होंने आक्रमण और रक्षण का बेहतरीन संतुलन दिखाया। जीत के बाद पदक समारोह में राष्ट्रगान के दौरान उनकी आंखें खुशी से चमक उठीं।
मीनाक्षी ने लिया बदला
डेब्यू कर रही मीनाक्षी हुड्डा ने भी कमाल कर दिया। उन्होंने पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता कजाखस्तान की नाजिम काइजेबे को फाइनल में हराकर जुलाई में हुई पिछली हार का बदला लिया। 24 वर्षीय मीनाक्षी ने अपनी लंबी पहुंच और तेज़ मुक्कों से मुकाबले में दबदबा बनाए रखा।
नुपूर और पूजा का संघर्ष
नुपूर शेरोन को फाइनल में पोलैंड की अगाता काज्मार्स्का से कड़े मुकाबले में हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं पूजा रानी सेमीफाइनल तक पहुंचीं लेकिन स्थानीय खिलाड़ी एमिली एस्क्विथ से हारकर कांस्य पदक जीत सकीं।
भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
इस बार भारत ने चार पदक अपने नाम किए, जो विदेशी धरती पर महिला वर्ग में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। जैसमीन और मीनाक्षी अब एमसी मैरीकॉम, निकहत जरीन, लवलीना बोरगोहेन और स्वीटी बूरा जैसी विश्व चैम्पियनों की सूची में शामिल हो गई हैं।