बदायूं ज़िले के मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव सैहपुरा निवासी किसान ओम सरन पुत्र वीरपाल ने तिली की फसल में कीट (सुंडी) लगने के बाद उपचार के लिए ग्राम ललबुझिया के एक निजी कृषि-इनपुट विक्रेता से संपर्क किया। ओम सरन ने बताया कि उसकी 8 बीघा ज़मीन में तिली की फसल फूल पर आ चुकी थी, और उसी अवस्था में कीटों ने हमला कर दिया था। इस स्थिति को देखते हुए, वह ललबुझिया गांव में स्थित धर्मेंद्र की दुकान पर पहुंचा और विशेष रूप से यह अनुरोध किया कि ऐसी दवा दी जाए जिससे फूलों पर असर न पड़े और फसल को कोई नुकसान न हो
दुकानदार धर्मेंद्र ने ओम सरन को कीटनाशक प्रदान किया, जिसे किसान ने अपनी फसल पर छिड़का। लेकिन छिड़काव के कुछ ही दिनों में तिली की फसल में भारी नुकसान देखने को मिला। फूल झड़ गए और पौधों की वृद्धि रुक गई। ओम सरन ने जब इसकी शिकायत दुकानदार धर्मेंद्र से की, तो उसने न सिर्फ जवाब देने से इनकार कर दिया, बल्कि अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, "जो करना है कर लो"।
इस व्यवहार से आहत ओम सरन मायूस होकर लौट आया। पीड़ित किसान ने प्रशासन से उचित कार्रवाई और मुआवज़े की मांग की है। यह मामला न केवल एक किसान की फसल हानि का है, बल्कि कृषि-इनपुट की गुणवत्ता और विक्रेताओं की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।
अगर समय रहते कार्रवाई न की गई, तो अन्य किसान भी इस तरह की लापरवाही का शिकार हो सकते हैं।