अल्मोड़ा, एजेंसी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और डेमोग्राफी को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। इसी कड़ी में प्रदेश में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सीएम ने घोषणा की कि 1 जुलाई 2026 के बाद ऐसे मदरसे स्वतः बंद हो जाएंगे, जहां राज्य सरकार के बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू नहीं होगा।
धामी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से अल्मोड़ा में आयोजित मां नंदा देवी मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव भर नहीं है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक सशक्तिकरण का भी बड़ा मंच है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले वर्ष होने वाली मां नंदा राजजात यात्रा को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह यात्रा 12 वर्ष में एक बार होती है और राज्य सरकार इसमें किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ेगी।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर चल रहा है। धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण जिस तरह किया जा रहा है, वह अद्वितीय है। इसी मार्गदर्शन में उत्तराखंड सरकार भी धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण, आध्यात्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
धामी ने बताया कि प्रदेश में उनकी सरकार ने अब तक कई कठोर और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी सख्त कानून लागू किए गए। लैंड जिहाद पर भी प्रभावी कार्रवाई की गई है, जिसके तहत अब तक 6500 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। इसके अलावा 250 अवैध मदरसे सील किए गए और 500 से अधिक अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब प्रदेश की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए आवश्यक था।
मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि उत्तराखंड में पहली बार सख्त भू-कानून उनकी ही सरकार लेकर आई, जिससे किसानों की जमीनें अब लैंड माफियाओं के कब्जे से सुरक्षित रहेंगी।
अल्मोड़ा के विकास की दिशा में धामी ने कई नई योजनाओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि मां नंदा देवी मंदिर का पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण पारंपरिक पर्वतीय स्थापत्य शैली में किया जाएगा। साथ ही डीनापानी में ‘‘नंदा देवी हस्तशिल्प ग्राम’’ की स्थापना होगी। इस क्राफ्ट विलेज के माध्यम से स्थानीय महिला उद्यमियों को ‘‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’’ से जोड़ा जाएगा। यहां निर्मित ऐपण कला, काष्ठ शिल्प, ताम्र उत्पाद और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प न केवल प्रदेश, बल्कि देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बुनियादी ढांचा विकसित करना ही नहीं है, बल्कि लोककला, संस्कृति, परंपरा और आस्था को भी मजबूत बनाना है। ‘‘उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन परंपराओं और संस्कृति की आत्मा है। इस आत्मा की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और सरकार इसके लिए लगातार काम कर रही है।’’