बरेली। कक्षा केजी से 12 तक के छात्रों ने भाषण, नारे, कविता आदि कार्यक्रमों के माध्यम से गांधी-शास्त्री जी के देश की स्वतंत्रता और विकास में दिए योगदान को न केवल याद किया, बल्कि उनकी सादगी, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा के प्रसंगों से ओतप्रोत कार्यक्रमों से सीख भी ली।
नन्हे मुन्नों ने गांधी-शास्त्री जी की वेशभूषा में करो या मरो, जय जवान जय किसान आदि नारे लगाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कक्षा आठ की भव्या ने गांधी जी और कक्षा सात की कोपल ने शास्त्री जी पर भाषण दिया। शिक्षकों ने वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाने रे और दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल आदि गीत प्रस्तुत किए।
प्रधानाचार्य ने कहा कि गांधी-शास्त्री जी के आदर्श और चरित्र हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, सादगी और ईमानदारी एक मिसाल है। उनका अनुसरण कर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी का व्यक्तित्व और कृतित्व इतना प्रभावशाली था कि आज भी उनके आदर्शों को गांधीवादी सोच कहा जाता है। रिद्धि अग्रवाल ने बच्चों को शास्त्री-गांधीजी के सादा जीवन उच्च विचार को आत्मसात कर सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत ने पूरे विश्व में क्रांति ला दी थी और अनेकों महान विभूतियों ने उनको अपना आदर्श माना और उनके सिद्धांतों का अनुसरण किया। इसी कारण प्रति वर्ष 2 अक्तूबर को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। समारोह के अंत में राष्ट्रगान हुआ। कार्यक्रम का संचालन रजनीश त्रिवेदी ने किया।