शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़कर भागने के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है। मंगलवार को स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन के नेताओं ने कहा कि वे नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस को देश की अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाना चाहते हैं।
संगठन के एक नेता नाहिद इस्लाम ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा कि उन्होंने यूनुस (84) से पहले ही बात कर ली है और वह बांग्लादेश को बचाने के लिए यह जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हो गए हैं। वीडियो में नाहिद के साथ दो अन्य समन्वयक भी दिखाई दे रहे हैं।
नाहिद ने कहा कि अंतरिम सरकार के अन्य सदस्यों के नाम की घोषणा जल्द की जाएगी। इससे कुछ ही घंटों पहले बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने घोषणा की थी कि संसद को भंग करने के बाद जल्द से जल्द अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा। शहाबुद्दीन ने सोमवार देर रात राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि उन्होंने शेख हसीना का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को रिहा करने का आदेश दे दिया है, जो कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद से घर में नजरबंद हैं।
24 घंटे के अंदर अंतरिम सरकार की होगी घोषणा
नाहिद ने कहा कि संगठन ने अंतरिम सरकार की घोषणा करने के लिए पहले 24 घंटे का समय लिया था लेकिन अराजक स्थिति पैदा होने पर नाम की घोषणा तुरंत करनी पड़ी। उन्होंने राष्ट्रपति से भी यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने का अनुरोध किया है। यूनुस अभी देश से बाहर हैं लेकिन उन्होंने इस घटनाक्रम को बांग्लादेश की दूसरी मुक्ति करार दिया है।
हिंसा में अब तक 119 लोगों के मारे जाने की खबर
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में पिछले दो दिन में हुई हिंसा में करीब 119 लोग मारे गए हैं। नाहिद ने कहा कि यह हिंसा शेख हसीना के समर्थको द्वारा उनके आंदोलन को विफल करने के लिए की जा रही है। देश में अराजकता का माहौल होने की वजह से लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति से कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। संगठन के छात्र भी सुरक्ष बालों की मदद के लिए सड़कों पर मौजूद रहेंगे। छात्रों द्वारा प्रस्तावित सरकार के अलावा किसी अन्य सरकार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गरीबी उन्मूलन अभियान चलाने के लिए यूनुस को मिला नोबेल
मोहम्मद यूनुस को ग्रामीण बैंक के माध्यम से गरीबी उन्मूलन अभियान चलाने के लिए 2006 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके यह तरीका कई महाद्वीपों में अपनाया गया। यूनुस और हसीना सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हसीना के 2008 में सत्ता में आने के बाद यूनुस के खिलाफ कई जांच शुरू कराईं। 2011 में ग्रामीण बैंक की गतिविधियों की समीक्षा कराई और सरकारी सेवानिवृत्ति विनियमन का उल्लंघन करने के आरोप में यूनुस को इसके संस्थापक प्रबंध निदेशक पद से हटा दिया था। यूनुस के खिलाफ दर्जनों मामलों में आरोप लगाए गए हैं। जनवरी में यूनुस को श्रम कानून उल्लंघन के आरोप में अदालत ने छह महीने कारावास की सजा सुनाई थी।
शेख हसीना के जेल में होने पर पार्टी बनाने की थी घोषणा
यूनुस ने 2007 में राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की थी। उस समय देश में सैन्य समर्थित सरकार थी और हसीना जेल में थीं। शेख हसीना उनकी इस घोषणा से नाराज हो गई थीं। हालांकि उन्होंने पार्टी नहीं बनाई। उस समय उन्होंने बांग्लादेशी नेताओं की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि उनकी रुचि केवल पैसे में है। यूनुस ने एक साक्षात्कार में देश लौटने और अपना काम जारी रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए छात्रों की प्रशंसा की और हसीना पर अपने पिता एवं बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को नष्ट करने का आरोप लगाया था।