Friday, January 30, 2026

मध्यकाल में चरम पर थी ब्रज की भक्ति : आचार्य श्रीवत्स

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 28, 2024

मध्यकाल में चरम पर थी ब्रज की भक्ति : आचार्य श्रीवत्स
मथुरा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद की राष्ट्रीय संगोष्ठी में आचार्य श्रीवत्स ने कहा कि मध्यकाल में ब्रज में भक्ति चरम पर थी। हर ओर भक्ति का उद्घोष था।आचार्य श्रीवत्स ने कहा कि श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ, कुछ राजाओं और अंग्रेज फैड्रिक के बाद उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ही ऐसी संस्था बनी है जो आज ब्रज को पूर्णतः संवार रही है। इनके अलावा किसी ने ब्रज की सुध नहीं ली। 
मुख्य अतिथि ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि महान संत देवराह बाबा ने पहले ही कह दिया था कि भारत एक दिन विश्वगुरू बनेगा। इसकी शुरुआत ब्रज से ही होगी। उनकी बात पूरी तरह सार्थक होने जा रही है।
ब्रज के लीलास्थल, कुंड और वनों को संवारने का चल रहा काम
परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि ब्रज की सांस्कृतिक धरोहरों की पुनर्प्रतिष्ठा का संकल्प आगे बढ़ रहा है। परिषद समूचे ब्रज के लीला स्थल, कुंड, वनों आदि को संवारने का कार्य कर रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल की इच्छा के अनुरूप यह संगोष्ठी आयोजित की गई है। इस आयोजन का ध्येय भक्ति साहित्य की पुनर्प्रतिष्ठा है। भारतीय भाषाओं में श्रीकृष्ण से जुड़ी 24 पुस्तकों की शृंखला का प्रकाशन कराया जा रहा है।
परियोजनाओं पर बनी लघु फिल्म भी दिखाई
संगोष्ठी में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से कराए गए कार्यों और परियोजनाओं पर तैयार लघु फिल्म भी दिखाई गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. नृत्य गोपाल शर्मा ने ब्रज भक्ति साहित्य पर संगोष्ठी के औचित्य पर प्रकाश डाला। ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ उमेश चंद्र शर्मा ने भक्ति युग की शुरुआत से लेकर अब तक के विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। 
गोष्ठी में इन लोगों ने व्यक्त किए विचार
साहित्यकार नटवर नागर, जय किशोर शरण, हरिदास संप्रदाय के गोस्वामी ललित बिहारी  ने साहित्यकार दिल्ली विवि के प्रो च॔दन कुमार, सुक्रत गोस्वामी, वृंदावन शोध संस्थान से राजेश शर्मा, ताराचंद प्रेमी ने विचार व्यक्त किए। केआर कॉलेज के संस्कृति विभाग के अध्यक्ष डॉ रामदत्त मिश्रा ने गर्ग संहिता में ब्रजभक्ति पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। दिल्ली विवि के डॉ विजय कुमार मिश्रा ने भक्ति साहित्य की उपेक्षा पर, कपिल देव उपाध्याय ने भगवत रसिक, निकुंज बिहार की भावना और उसके मूलतत्व पर प्रकाश डाला।
ये रहे मौजूद
इस दौरान ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र और सीईओ एसबी सिंह ने वक्ताओं को सम्मानित किया। संगोष्ठी में साहित्यकार दिनेश पाठक शशि, महेश चंद्र शर्मा, डॉ. रमाशंकर पांडेय  प्रो. दिनेश खन्ना, डॉ अनीता चौधरी, केके. शर्मा, डॉ. शारदा मिश्र, डॉ. नीतू गोस्वामी,  प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।

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